बिना जुताई की बुआई और पराली प्रबंधन से कमाल; पंजाब-हरियाणा के किसान पहली बार 'कार्बन क्रेडिट' से कमा रहे लाखों रुपये
लुधियाना: पंजाब और हरियाणा के अन्नदाता अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के जरिए लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं。 दोनों राज्यों के किसानों ने पराली (फसल अवशेष) जलाने की प्रथा को छोड़ दिया है और जुताई कम करके सीधी बिजाई (DSR) व प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाया है。 इस सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि किसानों को इतिहास में पहली बार 'कार्बन क्रेडिट' के जरिए बंपर कमाई हो रही है
अब तक पंजाब और हरियाणा के लगभग 2,550 किसानों को कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के तहत 3 हजार रुपये से लेकर 1.17 लाख रुपये तक की पहली पेमेंट मिल चुकी है。 कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट से किसानों ने अब तक 2.9 करोड़ रुपये की कमाई की है。 इसमें अकेले पंजाब के 1,400 से अधिक किसान शामिल हैं, जिन्होंने 30 हजार एकड़ जमीन पर पर्यावरण-अनुकूल खेती कर 50 हजार से अधिक सत्यापित कार्बन क्रेडिट हासिल किए हैं
सॉयल सैंपलिंग और सैटेलाइट से होती है निगरानी
इस पूरे प्रोजेक्ट की कमान 'ग्राइंडिंगो' नामक कंपनी संभाल रही है, जिसने 2019 से 2022 के बीच अपनाए गए वैज्ञानिक तरीकों के आधार पर पहली पेमेंट जारी की है。 खेतों का विश्लेषण सॉयल सैंपलिंग, रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट के जरिए किया जाता है。
पराली जलाने के मामले 93% तक घटे
इस वैज्ञानिक खेती के कारण पंजाब में पराली जलाने के मामलों में पिछले चार वर्षों में रिकॉर्ड 93% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस बदलाव से करीब दो लाख टन पराली जलने से बच गई, जिससे वायु की गुणवत्ता में भारी सुधार हुआ है और 1,000 टन पीएम 2.5 (PM 2.5) के उत्सर्जन को रोका जा सका है